उत्तराखंड को वैसे तो देव भूमि के नाम से जाना जाता है। यहाँ शायद ही ऐसा कोई स्थान रहा हो जहाँ भगवानों का निवास ना रहा हो या उनके होने के साक्ष्य ना मिले हों, शायद इसीलिए उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से जाना जाता है। इसी में हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड के चमोली जिले के तहसील जोशीमठ से लगभग 85 किलोमीटर की दूरी पर स्थित टिम्मरसैंण गुफा या टिम्मरसैंण महादेव की जो कुछ ही समय पहले सामने आया है। वैसे तो यह स्थान सदियों से अपने आसपास के रहने वाले व्यक्तियों के लिए एक- खास आस्था और पवित्रता को बनाए हुए है। परंतु कुछ समय से यह स्थान जनसामान्य के लिए एक नया तीर्थ स्थल बन गया है।

टिम्मरसैंण महादेव की स्थिति

टिम्मरसैंण महादेव उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ तहसील से लगभग 80 से 85 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह हिंदुस्तान के एक अंतिम गांव में से जो कि नीति है के समीप स्थित है।

टिम्मरसैंण महादेव

हिमालय की गोद में विराजमान यह पवित्र स्थान भगवान शिव को समर्पित है। भगवान शिव के एक धाम के रूप में जिसे अमरनाथ की उपाधि भी दी जाती है यह बाबा बर्फानी का स्थान है। अमरनाथ की तरह यहाँ भी सर्दियों में एक पत्थर की चट्टान के अंदर बर्फ का विशाल शिवलिंग बनता है और आसपास के लोगों के लिए यह किसी अमरनाथ से कम नहीं है, क्योंकि इसके निर्माण और प्राकृतिक स्वरूप एवं स्थिति वैसी ही है।

मंदिर के आसपास की बर्फीली चट्टानों का दृश्य अत्यंत ही मनमोहक है और पहाड़ों ने बर्फ की चादर ओढ़ रखी है। उससे निकलता ठंडा पानी जो अपने को एक नदी में ढालती रहती है। वैसे तो यहाँ पेड़-पौधे कम ही हैं पहाड़ों पर तो बिल्कुल ही नहीं किन्तु नदी की तलहटी में कुछ झाड़ियां और छोटे- छोटे पेड़ पौधे स्थित हैं, जो कि यहां इसकी सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं।

टिम्मरसैंण महादेव की स्थिति

टिम्मरसैंण महादेव के दर्शन करने का सही समय नवंबर से मार्च तक का है। क्योंकि उस समय पहाड़ों में बर्फ रहती है जिसके कारण चट्टान के अंदर टपकता हुआ पानी एक विशाल शिवलिंग का रूप ले लेता है। जिससे कि यहां आपको शिवलिंग के दर्शन हो सकते हैं। पहाड़ों में जैसे-जैसे गर्मियों का मौसम आता है वैसे- वैसे बर्फ पिघलनी शुरू हो जाती है उस समय आपको शिवलिंग के दर्शन नहीं हो पाएंगे।

वैसे सर्दियों में यहां जाना मौसम की दृष्टि से थोड़ा मुश्किल है परंतु यहां जाने के बाद जो आनंद की अनुभूति होती है इसके सामने सारी मुश्किलों को आप दरकिनार कर देंगे। यहां जाने के लिए आपको ऋषिकेश से बस से कर्णप्रयाग आना होगा फिर वहां से जोशीमठ आना होगा उसके बाद आप नीति के लिए टैक्सी या कोई छोटी गाड़ी ले सकते हैं, यह स्थान जोशीमठ से करीब 85 किलोमीटर के लगभग और नीति से 1 किलोमीटर पहले पड़ता है। मंदिर मुख्य सड़क से 700 से 800 मीटर की दूरी पर है मंदिर के आसपास का दृश्य अत्यंत ही मनमोहक है।

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2 Comments

  1. Nice,Naveen ji
    Shayad bahut se logon ke liye ekdum nayee jankari hai including me also.
    Thank you for this new information.

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