लॉकडाउन में शिक्षा

विश्वव्यापी लॉकडाउन के बीच तमाम देशों में ऑनलाइन कक्षाएँ और इंटरनेट से पढ़ाई पर जोर है; भारत भी इससे अछूता नहीं जहाँ ऑनलाइन शिक्षा की जरूरत और उसके कारोबार के बीच डिजिटल साक्षरता और डिजिटल विभाजन जैसे मुद्दे सामने हैं।
जैसा कि विश्व में चल रहे कोरोना महामारी के चलते पूरे विश्व में लॉकडाउन किया गया जिसमें लोगों का घर से निकलना लगभग बंद हो गया और सारे काम काज भी छूट गए इसका असर शिक्षा जगत में भी दिखा अगर हम बात करें भारत की तो भारत में भी इस महामारी के चलते 23 मार्च से लॉकडाउन शुरू किया गया और सारे अपने- अपने घरों में कैद हो गए. सभी कामकाज पर भी इसका प्रभाव देखने को मिला अगर हम बात करें शिक्षा की; तो शिक्षा के बारे में भारत में लॉकडाउन के चलते पूरी शिक्षा व्यवस्था डगमगा गई और सारे औपचारिक ओर अनौपचारिक शिक्षा संस्थान बंद करने पड़े कुछ समय पश्चात सरकार या निजी संगठनों द्वारा ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था की शुरुआत की गई और भिन्न- भिन्न स्तर पर और भिन्न- भिन्न माध्यमों से इसका संचालन भी किया गया पर क्या इसके लिए भारत तैयार था जहाँ की इससे जुड़े साधन पर्याप्त भी नहीं थे यह कहीं ना कहीं सवाल उठाता है।

भारत में इंटरनेट की पहुँच

सरकारी आँकड़ों के मुताबिक देश में 993 विश्वविद्यालय करीब 40 हजार महाविद्यालय 385 निजी विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा के चार करोड़ विद्यार्थी हैं।
2019 सीबीएसई के अनुसार कक्षा 10 से 12 के 31 लाख विद्यार्थी नामांकित है। इसके अलावा अन्य संस्थानों से भी हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में सिर्फ 36 फ़ीसदी लोग इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं भारत में कुल इंटरनेट यूजर्स की संख्या 45.1 करोड़ है इस तरह देश में इस समय 29 करोड स्मार्टफोन यूजर्स हैं।

भारत में ऑनलाइन शिक्षा

इन रिपोर्ट के आधार पर कह सकते है कि ऑनलाइन शिक्षा भारत में विद्यार्थियों के लिए कितनी कारगर सिद्ध होगी और कितनी नहीं. प्रोफेसर अभिरूप मुखोपाध्याय ने राष्ट्रीय सैंपल सर्वे संगठन के आंकड़ों के आधार पर अपने एक लेख में बताया है कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वालों में 85% शहरी छात्रों के पास इंटरनेट है लेकिन उनमें से 40% ही ऐसे हैं जिनके पास घर पर भी इंटरनेट है। उधर 55% उच्च शिक्षारत ग्रामीण छात्रों के पास इंटरनेट है लेकिन 28% छात्रों के घर पर इंटरनेट की पहुंच है। राज्यवार अगर हम देखें तो केरल में 51% ग्रामीण परिवारों की इंटरनेट तक पहुंच है लेकिन 23% परिवार में ही इंटरनेट उपलब्ध है। बिहार, बंगाल में तो और भी बुरा हाल है यहां पर 7 से 8% तक ही इंटरनेट उपलब्ध है इस आधार पर यह देखना की ऑनलाइन शिक्षा भारत में कितनी कारगर है माना कि भारत पहले से तैयार नहीं था परंतु वर्तमान में शिक्षा संस्थान अपने अपने पाठ्यक्रम को पूरा करने में लगे हैं इसके आधार पर यह सोचनीय विषय है।

गूगल ने अपनी ऑनलाइन शिक्षा 2021 शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें 2016 से 2021 की अवधि के दौरान भारत में ऑनलाइन शिक्षा के कारोबार में 8 गुना वृद्धि आंकी की गई है। 2016 में 5 करोड़ डालर का था और 2021 में इसका मूल्य बढ़कर करीब 2 अरब डालर हो जाएगा। यूजर्स की संख्या 2016 में 16 लाख थी और 2021 में एक करोड़ की संभावना आंकी गई है। भारत में लॉकडाउन के शुरू होते ही परिस्थितियाँ कुछ इस तरह बदल जाती है कि जहां सभी घर सुकून से रहने के होते थे वह जगह ऑनलाइन कामकाज, ऑनलाइन पढ़ाई और क्वेंरटीन का ठिकाना बन जाते हैं। और अचानक ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफार्म और वर्चुअल कोचिंग वजूद में आते हैं। जो विशेषज्ञ कुछ समय से लॉकडाउन के चलते घर बैठे थे वह लोग ऑनलाइन क्लास चलाना प्रारंभ कर देते हैं। टेलीग्राम, व्हाट्सएप, स्काइप, यूट्यूब आदि के माध्यम से अचानक एक नया e-market खुल जाता है शिक्षा सामग्री का और छात्रों में भी रजिस्ट्रेशन की होड़ लग जाती है. ऑनलाइन क्लास रूम के लिए कोरसेरा, बाईजूस, वेदांत, माइंडस्पार्क जैसे बहुत से ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफार्म भी मांग बढ़ जाती है। अचानक सब कुछ बदल जाने के कारण और भारत में सदियों से लोकप्रिय चली आ रही औपचारिक शिक्षा के स्थान पर अनौपचारिक शिक्षा (ऑनलाइन शिक्षा) का आना और इनका देश के भविष्य के लिए छात्रों को तैयार करना यह जटिल समय ओर कार्य दोनों था।

भारत की ऑनलाइन शिक्षा तैयारी

सरकार की ओर से ई- बस्ता, डिजिटल इंडिया जैसे कई अभियान चलाएं थे परंतु इनकी जन सामान्य तक पूर्ण रूप से पहुंच नहीं थी। और ऑनलाइन शिक्षा के लिए भारत में बहुत से साधनों का होना भी जरूरी था जैसे बिजली इंटरनेट दूरसंचार आदि इस सब की सुगमता के बीच एक नई पहल करने की भी आवश्यकता थी। जिससे भविष्य में छात्रों के एक अच्छा और सुचारू शिक्षा प्लेटफार्म दिया जा सके और जो है वह उसका सही इस्तेमाल कर सके इसके लिए एक नए स्तर पर योजना बनाने की या मार्गदर्शन करने की जरूरत भी हैं। चाहे छात्र हो या शिक्षक।
शिक्षक क्लास रूम में पढ़ाते समय बहुत से भौतिक वस्तुओं का इस्तेमाल करता है और जिससे छात्रों को समझाना आसान होता है परंतु ऑनलाइन क्लास में यह मुमकिन नहीं और छात्राओं को ऑनलाइन क्लास लेने के लिए एकाग्रता की अधिक आवश्यकता पढ़ती है क्योंकि ऑनलाइन क्लास लेते समय जिन सोशल प्लेटफार्म या किसी अन्य प्लेटफार्म का हम इस्तेमाल करते हैं उससे हमारी शिक्षा में बहुत अधिक व्यवधान भी उत्पन्न होते हैं। जिनका सबको ध्यान रखना होगा छात्रों के मन में इस समय भविष्य को लेकर और एक लंबे समय से घर में स्थिर रहकर मनोवैज्ञानिक विकार और चिंताओं जैसे समस्याओं का सामना भी करना पड़ रहा है अतः इस महामारी ने भविष्य में शिक्षा को बदलने का संकेत ही नहीं दिया नए रास्ते भी खोल दिए हैं।

“धन्यवाद “

Share this post on your social media ...
Share on Facebook
Facebook
Tweet about this on Twitter
Twitter

9 Comments

      1. Pls see the report of Azim Premji Foundation on online education.

        Best wishes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *